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छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की पहचान हुई है. 15 मरीजों का इलाज रायपुर के एम्स अस्पताल में जारी है. रायपुर एम्स अस्पताल में इसे लेकर डॉक्टरों की बैड़ी बैठक बुलाई गई है.

रायपुर 12 मई (KRB24NEWS) : छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की पहचान हुई है. ऐसे 15 मरीजों का इलाज फिलहाल रायपुर के एम्स अस्पताल में जारी है. बीमारी को छत्तीसगढ़ की सरकार ने गंभीरता से लिया है. सीएम भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए सभी जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए हैं. बुधवार की शाम एम्स में इसे लेकर डॉक्टरों की बैठक आयोजित की गई है.

डायबिटीज के पेशेंट ब्लैक फंगस के हो रहे शिकार

म्यूकस माइकोसिस बीमारी (Mucus Mycosis disease ) से पीड़ित 15 मरीज फिलहाल एम्स में भर्ती हैं. उनका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में जारी है. डॉक्टर राकेश गुप्ता ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस से होने वाली बीमारी म्यूकस माइकोसिस से पीड़ित मरीज मिले हैं. कोरोना से ठीक होने वाले खासतौर पर डायबिटीज के पेशेंट (Diabetics) इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं.

ब्लैक फंगस के लक्षण

इस बीमारी को म्यूकस माइकोसिस भी कहते हैं. इसके लक्षण नाक-कान-मुंह में ब्लैक स्पॉट नजर आना है. यदि इस तरीके के ब्लैक स्पॉट आपको कान नाक या मुंह के पास नजर आते हैं तो आप समझ लीजिए कि यह ब्लैक फंगस के लक्षण हैं. यह बीमारी सबसे पहले आंखों में फैलती है, जिसके चलते आंखों की रोशनी तक जाने का खतरा रहता है. फिर आंखों से होते हुए यह फंगस दिमाग तक पहुंच सकता है.

ब्लैक फंगस सबसे घातक बीमारी

इस रोग में आंख की नसों के पास फंगस इंफेक्शन जमा हो जाता है. जो सेंट्रल रेटिनल आर्टरी का रक्त प्रवाह बंद कर देता है. इसकी वजह से आंखों की रोशनी भी जा सकती है. कोरोना संक्रमित कुछ मरीजों में ब्लैक फंगस म्यूकस माइकोसिस इंफेक्शन देखा गया है. यह इंफेक्शन इम्यूनिट पावर कमजोर होने पर मनुष्य के शरीर में घातक प्रभाव छोड़ता है . ICMR ने एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा गया है कि अनियंत्रित डाइबिटीज और आईसीयू में ज्यादा दिन बिताने वाले कोविड के मरीजों में ब्लैंक फंगस का असर ज्यादा देखा जा रहा है. अगर समय पर इस बीमारी का इलाज नहीं किया जाए तो यह बीमारी मरीज के लिए घातक हो सकती है.