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बिलासपुर (KRB24 News) :- मोतियाबिंद, नार्मल प्रसव, दांतों का ऑपरेशन, मलेरिया, नसबंदी सहित 114 बीमारियों का इलाज डॉक्टर खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत निजी अस्पतालों में नहीं होने से मरीज परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्र में खुले सरकारी अस्पतालों में इन बीमारियों का इलाज होना संभव नहीं है। सिम्स और जिला अस्पताल के भरोसे लोग आयुष्मान योजना से इलाज कराने के लिए भटक रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इन बीमारियों का सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पर आयुष्मान से उतना ही पैसा लिया जाता है जितना कि निजी अस्पताल में लेते थे। तो फिर निजी में यह इलाज क्यों बंद किया गया। जबकि निजी अस्पताल संचालित करने वालों का कहना है कि सरकार ने इन बीमारियों को निजी अस्पतालों के दायरे से इसलिए बाहर कर दिया है कि लोग सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं और सरकार के खाते में ही पैसा जाए।
इसी कारण शासन ने जनवरी 2020 में यह फैसला किया कि 114 तरह की बीमारियों का इलाज करने से निजी अस्पताल को आयुष्मान योजना की श्रेणी से बाहर कर दिया। सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि शासन ने यह निर्णय लिया है। लोग अभी थोड़ा परेशान हैं। धीरे-धीरे व्यवस्था बन जाएगी। जब हमारे अस्पतालों में यह सुविधा हैं तो फिर निजी में जाने की क्या जरूरत है।
94 फीसदी लोग निजी अस्पताल में करा रहे मोतियाबिंद के ऑपरेशन
पिछले पांच साल के आंकडे पर जाएं तो निजी अस्पतालों में 94 प्रतिशत मरीजों ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराएं हैं। इनमें से ज्यादातर ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत हुए हैं। अप्रैल 2015 से लेकर अक्टूबर 2020 तक छह सालों में जिले में 92 हजार 605 लोगों ने मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया। सरकारी अस्पताल में सिर्फ 6 फीसदी यानी 5213 ऑपरेशन ही हो पाए हैं। निजी में यह संख्या 87392 है। यानी 94 फीसदी रोगियों ने निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराए।
43 निजी और 55 सरकारी अस्पतालों में होगा इलाज
आयुष्मान योजना से 2031 प्रकार की बीमारियों का इलाज होता है। जिले में इसके लिए 43 निजी और 55 सरकारी अस्पताल हैं। 114 तरह की बीमारियों को छोड़ अन्य सभी का इलाज निजी अस्पताल और सरकारी दोनों अस्पतालों में हो रहा है। मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
इन बीमारियों का इलाज बंद हो गया है
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में उन्हीं बीमारियों को निजी अस्पताल के पैकेज से हटाया गया है, जिनके उपचार की सुविधा सरकारी अस्पतालों में है। इसमें मलेरिया, हार्निया, पाइल्स, हाइड्रोसिल, पुरुष नसबंदी, डिसेंट्री, डेंटल से संबंधित बीमारी शामिल हैं।
योजना में 60 प्रतिशत अंशदान केंद्र सरकार का
इस योजना से इलाज के लिए मरीजों को 60 फीसदी केंद्र सरकार तो 40 प्रतिशत राज्य सरकार का अंशदान होता है। नई सरकार बनने के बाद इस योजना का नाम डॉक्टर खूबचंद्र बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना रखा गया है। जिले में 3 लाख लोगों का आयुष्मान कार्ड बन गया है।
