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विधानसभा चुनाव में शराबबंदी बड़ा मुद्दा रहा है। इसे लेकर भाजपा ने बड़ा अभियान भी चलाया था। अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर शराबबंदी की मांग उठ रही है। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने रविवार को राजधानी में कंवर समाज के कंवर महोत्सव सम्मान समारोह के दौरान इसे प्रमुखता से उठाया। इस दौरान मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद थे। उन्होंने समाज के साथ-साथ मुख्यमंत्री से शराबबंदी करने का निवेदन किया।

कंवर ने समाज के मंच से कहा, एक बार समाज और आम लोगों के हित के लिए नशाबंदी कर दें। पिछले समय मैंने कसम खाई थी कि यदि इस बार भाजपा की सरकार नहीं बनी तो मैं राजनीति नहीं करूंगा। आदिवासियों का दर्द देखा हूं। शराब बनाने की छूट के बावजूद आदिवासियों को पकड़ा जाता था। यदि आदिवासियों को शराब बनाने की छूट है, तो उसे बंद कर दो। आदिवासी क्यों शराब बनाएगा और पकड़ा जाएगा।

तो कोई समाज को पीछे नहीं धकेल सकता

कंवर ने समाज से अपील करते हुए कहा, यदि कंवर समाज नशाबंदी कर ले तो बहुत आगे बढ़ जाएगा। नशा बंदी होती है, तो व्यक्ति की उम्र भी बढ़ जाएगी। मेरा निवेदन है कि समाज सहमति जताते है या कुछ लोग भी सहमत होते हैं तो नशाबंदी होनी चाहिए। यदि समाज नशाबंदी कर ले तो मैं समझता हूं कि इस आदिवासी कंवर समाज को कोई पीछे नहीं धकेल सकता।

तुलसीदास ने शराब को जहर माना है

कंवर ने मंच से अपने अनुभव भी साझा करते हुए कहा कि मैंने पांचवीं के बाद से शराब नहीं पी। बाद में जब हॉस्टल में आए तो रामायण पढ़ते है। तुलसी दास ने शराब को जहर माना है और दूध को अमृत। हमें अमृत पीना चाहिए जहर नहीं। उन्होंने कहा, पिछले समय पूर्व मुख्यमंत्री ने नशाबंदी का ऐलान कर दिया था।