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महासमुंद : नई तकनीक ने अब असंभव को भी संभव कर दिया है. नई तकनीक के जरिए आप ने बड़े-बड़े मकानों को एक जगह से दूसरी जगह पर शिफ्ट करते देखा या सुना होगा, पर आज हम आपको बड़े-बड़े वृक्षों को एक जगह से उखाड़ कर दूसरी जगह पर शिफ्ट कर पेड़ों को बचाने की मुहिम के बारे में बताने जा रहे हैं.

दरअसल, महासमुंद जिले में पहली बार नई तकनीक के जरिए बड़े पेड़ों को ट्रांसप्लांट कर बचाने की मुहिम शुरू हुई है. नेशनल हाइवे 353 में बेलसोंडा रेलवे क्रासिंग पर नए बनने वाले ओवर ब्रिज के लिए लगभग 125 बड़े पेड़ों को काटा जाना है. बड़े पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग ने योजना बनाकर पहले 24 औषधीय वृक्षों को चिन्हांकित किया और ट्रांसप्लांट करने की शुरूआत की.

वन विभाग ने पहले वृक्ष के डालों की छटाई करके एक्सकेवेटर (JCB) से पेड़ के चारों ओर खुदाई कर पेड़ को क्रेन से उठाकर ट्रांसप्लांट करने वाले स्थान पर पहुंचाया. फिर वन विभाग के ही पौधारोपण प्लांट में पहले से तैयार गड्ढे तक पेड़ को लाने के बाद विभिन्न दवाईयों का जड़ों में और गड्ढे में छिड़काव किया गया. फिर क्रेन से ही पेड़ को गड्ढे में उतार कर मिट्टी से भर दिया गया. पेड़ को खड़ा करने के बाद हल्दी का लेप भी पेड़ पर लगाया गया. पेड़ ट्रांसप्लांट वाले मुहिम में लगी फारेस्ट टीम के इंचार्ज ने बताया कि पेड़ की शिफ्टिंग को सिर्फ चार घंटे में अंजाम दिया गया.
