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बिलासपुर 25 मई 2022(KRB24NEWS):
देश के सबसे सुरम्य और शांत माने जाने वाले हमारे छत्तीसगढ़ राज्य जो कि भारत का ह्रदय स्थल भी है। दुख की बात यह है कि यहीं गत 2013 में 25 मई को कांग्रेस नेताओं की रैली पर झीरम घाटी में नक्सलियों ने सुनियोजित तरीके से हमला कर अनेक नेताओं को मौत के घाट उतार दिया। आज उन्हीं पलों को याद करते हुए घटना में दिवंगत हुए आत्माओं की स्मृति में ‘झीरम श्रद्धांजलि दिवस’ मनाया जा रहा है। इस बार इस दिन सीएम भूपेश बघेल बस्तर के चित्रकोट में झीरम शहीद स्मारक का लोकार्पण कर झीरम के शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे. बस्तर की झीरम घाटी में 9 साल पहले आज ही के दिन 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। झीरम नक्सली कांड में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी लीडरशिप खत्म हो गई। 25 मई 2013 को कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी। कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता इस परिवर्तन यात्रा में हिस्सा लेते हुए दरभा घाटी के झीरम पहुंचे थे कि तभी नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला कर दिया।जैसे ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला झीरम घाटी में पहुंचा। घात लगाए नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग में कांग्रेस नेताओं और उनके सुरक्षा गार्ड को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नक्सलियों ने कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा को ढूंढकर गोली मारी। उसके बाद नक्सलियों ने एक एक कर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले में महेंद्र कर्मा के अलावा तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के 29 नेताओं की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी. इलाज के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की भी जान चली गईं। कुल मिलाकर इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी नेतृत्व कर्ताओं की जमात खत्म हो गई। छत्तीसगढ़ में दस साल पहले हुआ झीरम घाटी नक्सल हमला अब भी लोगों को सताने वाला है। इसकी वजह है क्योंकि इस हमले के राज पर अब भी पर्दा डाला हुआ है। झीरम घाटी सुकमा जिले में आता है। यहां से 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा गुजर रही थी, इस यात्रा पर घात लगाए बैठे सैकड़ों नक्सलियों ने हमला बोल दिया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल के अलावा बस्तर के टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के अलावा अन्य कांग्रेसियों सहित सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। इस हमले में कुल 30 लोग मारे गए थे। कांग्रेस की एक पूरी नेताओं की कतार खत्म हो गई थी,

इस हमले में। नक्सलियों के हमले को हुए 10 वर्ष गुजर गए हैं, मगर अब तक यह बात सामने नहीं आ पाई है कि आखिर यह हमला क्यों और किन लोगों ने किया था, जिसमें साजिश की थी। सियासी तौर पर अब भी वार पलटवार का दौर जारी रहता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि झीरम घाटी हत्याकांड हमारे लिए भावनात्मक है। यह पहला ऐसा हमला था जिसमें नाम पूछपूछकर लोगों के मारा गया। इस हमले में जिंदा बच कर आए लोगों से एनआईए ने पूछताछ नहीं की है। इस मामले की एनआईए न जांच कर रही है न जांच करने दे रही है। एनआईए जो जांच हुई है उसकी कॉपी भी नहीं दे रही है। इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ, लेकिन झीरम घाटी की फाइल को राजभवन में जमा किया गया है। विपक्ष कुछ न कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है।उन्होंने आगे कहा कि यह हमारे लिए भावनात्मक मामला है पहली बार ऐसा हुआ था कि नक्सलियों ने नाम पूछ पूछ कर लोगों को मारा। तेलंगाना में पकड़े गए नक्सलियों से आखिर एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की, इतना ही नहीं जज का ट्रांसफर करा दिया गया उनके घर में सुतली बम फेंका गया। खैर इस मामले में तो आरोप-प्रत्यारोप और राजनीति का दौर चलता रहेगा। और ना जाने कब तक यह चलता रहेगा….? जब तक कि यह रहस्य बेनकाब नहीं हो जाता कि इस सुनियोजित घटना के पीछे किसका हाथ था। पुनः दिवंगत और हताहत हुए कांग्रेसी नेताओं सहित सभी दिवंगत आत्माओं को कोटि-कोटि नमन व श्रद्धांजलि।

– सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
